इतनी गहराई से लिखूँगा अपने पन्नों में तुम्हें ,
कि पढ़ने वालों को तलब हो जाएगी तुम्हें देखने की ।
शब्दों के आईने में ,
मैं लिखूँगा तुम्हें उस स्याही से,
जो चाँदनी रातों में चुपके से ,
मेरी आखों से रिसती है ।
मैं बनाऊंगा तुम्हारी तस्वीर ,
उन अल्फ़ाज़ों में,
जो कभी खत्म न हों ,
जब कोई पढ़े तुम्हें मेरे शब्दों में ।
लगे ऐसा कि किसी शीशे में ,
अपना कोई चेहरा देख रहा हो ,
पर उस चेहरे में हो ,
तुम्हारी झलक ….. ,
तुम्हारी हँसी …… ,
तुम्हारी बातें ……,
तुम्हारी खामोश निगाहों के अफसाने ।
स्याही में भीगती यादें ,
कलम की नोक जब पन्नों को छूएगी ।
स्याही में तुम्हारी यादें ,
यूं घुल सी जाएँगी ।
हर हर्फ़ में होगी तुम्हारी हल्की-सी खुशबू ,
हर शब्द में छिपा होगा ,
तुम्हारी आवाज़ का जादू ।
कोई पढ़ेगा जब मेरे इन लफ्ज़ों को,
तो उसकी आँखें ,
तुम्हारी आँखों को तलाशेंगी ।
मेरा हर अल्फ़ाज़ एक रास्ता बनेगा ,
जो उसे तुम्हारी ओर खींच ले जाएगा ।
यूँ लगेगा, जैसे तुम्हें देखे बिना ,
ये दास्ताँ अधूरी रह जाएगी ।
कभी तुम्हें धूप बनाकर लिखूँगा ,
जो मेरी जुल्फों से खेलती रही ।
कभी तुम्हें बारिश की वो पहली बूँद बना दूँगा ,
जिसमें मेरी तन्हाई को भीगाती रही ।
कभी तुम हवाओं की सरगोशी बनोगी ,
जो कानों में किसी राज़ की तरह गूँजती रही ।
कभी तुम मेरे ख्वाबों की परछाई बनोगी ,
जो सामने से गुजरकर भी दिल में ठहरती रही ।
जब कोई पढ़ेगा तुम्हारी बातें ,
तो उसकी आँखों में एक ख्वाब होगा ।
वो ढूँढेगा तुम्हें हर चेहरे में ,
हर राह में ……. ,
हर मोड़ पर …….,
यूँ लगेगा जैसे तुम कोई किरदार नहीं ,
बल्कि किसी की हकीकत हो ।
कोई खोजेगा तुम्हें हवाओं में ,
तो कोई बारिश की बूँदों में ।
कोई ढूँढेगा तुम्हें महकते गुलाबों में ,
तो कोई चाँदनी रातों के साये में ।
” रिंपु ” लिखेगा तुम्हें कुछ इस तरह ,
कि पढ़ने वाले जब पन्नों से गुजरें ,
पर ठहर जाएँ …… तुम्हारे नाम पर ।
मेरे हर अल्फ़ाज़ का जादू ,
उन्हें तुम्हारी आँखों में उलझा देगा ।
जब कोई पढ़ेगा मेरे लफ्ज़ों को ,
तो उनकी धड़कनों को तेज़ रफ्तार देगा ।
पढने वाले को लगेगा जैसे …..
तुम बस यहीं कहीं हो ,
उसके आसपास …… ,
उसकी साँसों में ….,
उसकी धड़कनों की ताल मे हो जैसे ।
और ये सिलसिला यूँ ही चलता रहेगा ,
” रिपुं ” के हर नए पन्ने पर …,
हर नई रात में …… ,
मेरे हर नए ख्वाब में ,
जब तक यह दिल ,
तुम्हें देखने को बेताब रहेगा ।
तब तक मेरी कलम ,
तुम्हें लिखती ही रहेगी ।
कसम से इतनी गहराई से ,
लिखूँगा तुम्हें …..।
कि पढ़ने वालों को ,
तलब हो जाएगी …..,
तुम्हें देखने की ……,
तुमसे मिलने की ……,
तुम में जीने की …।