हकलाहट की समस्या क्या है
जो शख़्स किसी बात को रुक – रुक कर बोले यां बोलते समय अचानक आवाज़ ना निकले उस स्थिति को हकलाहट कहते हैं। यह स्थिति बात को शुरू करने से पहले यां बीच में पैदा हो सकती है। आम बोलचाल की भाषा में हम इसे अटक-अटक कर बोलना भी कहते हैं ।
हकलाहट के जीवन की तुलना उस शख़्स के जीवन के साथ कर सकते हैं जो कि एक
अन्धेरे कमरे में बंद रहता है। जो चाह कर भी कमरे से बाहर नहीं निकल सकता। जिसकी सब इच्छाएं सब चाहतें उस कमरे में दफ़न रहती हैं। वह सब कुछ कर सकता है पर उस कमरे में से बाहर नहीं निकल सकता।
वह व्यक्ति उस कमरे की खिड़की से बाहर की दुनिया देख सकता है। लेकिन कभी उस दुनिया में शामिल नहीं हो सकता। वह एक घुटन भरा जीवन व्यतीत कर रहा होता है। उसकी सब इच्छाएं सब मनोरथ उसी कमरे तक सीमित रहते हैं।
वह अकेला पड़ जाता है और उसका कोई भी ऐसा मित्र नहीं होता जो कि उसकी इन इच्छाओं यां उसको समझ सके।
यां फिर हम इसकी तुलना एक ऐसे योद्धा से कर सकते हैं जो कि जिन्दगी के युद्धस्थल में अपने दुश्मन रूपी दोस्तों से घिरा होता है। और उनके द्वारा किए गए कटाक्ष भरे हमलों को अकेला सहता हुआ जीवन व्यतीत करता है। वह जीवन में बहुत कुछ करने की काबलियत रखता है पर हकलाहट कि वजह से कुछ ना कर पाने के कारण अपने आप को हारा हुआ महसूस करता है। वह एक अच्छे व्यक्तित्व का मालिक होते हुए भी लोगों के लिये एक मजाक का पात्र बन कर रह जाता है।
संसार में हकलाहट के विषय पर अलग – अलग विद्यवानो का अलग – अलग मत है।
एक मत यह कहता है कि हकलाहट एक दिमागी समस्या है। मतलब यह है कि हकलाहट दिमाग में पैदा हुई किसी कमी की वजह से उत्पन्न होती है। चूंकि मैं यह बात पहले भी बता चुका हूँ और यह सपष्ट भी है कि हकलाने वाले व्यक्ति दिमागी रूप से काफी परिपक्व होता है मतलब की वह एक तेज़ दिमाग का मालिक होता है
वहीं हकलाहट के विषय पर दूसरा मत यह कहता है कि यह एक बुरी आदत है जो की समय के साथ – साथ बड़ी और मजबूत होती जाती है। जो कि काफी हद तक सही भी है। पर मैं कहता हूँ कि अगर यह एक बुरी आदत है तब यह हर समय स्थिर क्यों नहीं रहती मतलब किसी गाने को गाते समय यां अपने किसी चीर – परिचित से बातचीत करते समय यह समस्या उत्पन्न क्यों नही होती।
हकलाहट के विषय पर एक मत यह भी है कि यह एक जैनेटिक ( genetic ) समस्या है। मेरे कहने का यह तात्पर्य है कि मोटापे और मधुमेह रोग की तरंह हकलाहट कि समस्या भी पीड़ित व्यक्ति को उसके माता – पिता यां रिश्तेदारों से विरासत में मिलती है। लेकिन मेरे पास ऐसे कई उदाहरण हैं अथवा मैं हकलाहट की समस्या से ग्रस्त ऐसे कई व्यक्तियों को जानता हूँ जो कि इस मत को भी नकारते हैं।
एक मत यह भी कहता है कि यह समस्या किसी बीमारी अथवा किसी चोट की वजह से उत्पन्न होती है। परंतु स्पष्ट रूप से इस मत को साबित करना कठिन है ।परंतु यह स्पष्ट है कि यह समस्या बचपन में ज्यादा डांट – फटकार और हकलाहट की समस्या से ग्रस्त किसी व्यक्ति की नक़ल करने से यह समस्या उत्पन्न हो सकती है।