हकलाहट की समस्या क्यों पैदा होती है
किसी व्यक्ति में हकलाहट की समस्या क्यों उत्पन्न होती है इस बात पर काफी समय से बहस छिड़ी हुई है। कोई इसे मानसिक समस्या कहता है और कोई इसे माता – पिता यां अपने किसी रिश्तेदार से विरासत में मिली बीमारी कहते हैं। और नीम – हकीम , डाक्टरों के पास इसका इलाज ढूंढते हैं । कुछ भोले भाले लोग इसे दैवीय प्रकोप मान कर औझाओं और तात्रिंको के पास अपना समय और पैसे बरबाद करते हैं।
अपने निजी अनुभव के आधार पर मैं आपको हकलाहट होने के पीछे कुछ कारणों का उल्लेख करने का प्रयत्न करता हूँ।
इसका एक कारण यह है कि जब हम किसी बात को बोलते हैं तो हम साथ – साथ सांस लेते हैं। यानि के हम हर 15 यां 20 सैकेण्ड के अंतराल में अपनी एक बात यां एक लाइन एक ही सांस में बोलते हैं । इस तथ्य को आसान भाषा में हम अगर बोलें तो मैं यह कहना चाहता हूँ कि हम बातचीत करते हुए हर 15 से 20 सैकेण्ड के अंतराल में सांस लेते हैं । सामान्य व्यक्ति को ऐसा करने में किसी प्रकार कि कोई दिक्कत पेश नहीं आती। परन्तु एक हकलाने वाले व्यक्ति को 15 से 20 सैकेण्ड के इस समय के बीच तालमेल बनाना कठिन हो जाता है। और यही तालमेल उस हकलाने वाले व्यक्ति की परेशानी का कारण बनती है।
अगर हम एक सामान्य व्यक्ति की तुलना एक हकलाहट की समस्या से ग्रस्त किसी व्यक्ति से करें तो हम हकलाहट के सही कारणों का पता लगा सकते हैं । यह बात प्रमाणित की जा चुकी है कि एक हकलाने वाले व्यक्ति का दिमाग सामान्य व्यक्ति के दिमाग कि तुलना में काफी तेज़ होता है । अगर हम गौर करेंगे तो पायेंगे कि एक बच्चा जो कि हकलाहट की समस्या से ग्रस्त है । उसकी बाक़ी सभी गतिविधियां जैसे पढ़ना – लिखना , कम्प्यूटर चलाना , और विडियो गेम खेलना आदि सामान्य बच्चों की तुलना में बेहतर ढंग से कर लेते हैं।
परन्तु इसका दूसरा पहलू देखें तो जानेंगे कि यही तेज़ दिमाग उसकी हकलाहट का मुख्य कारण बनता है । एक सामान्य व्यक्ति एक समय में एक ही बात को सोचता है और बोलता है। इसके विपरीत हकलाने वाले व्यक्ति के दिमाग में एक समय में कई बातें चल रही होती है । और इससे पहले वह हकलाना शुरू कर दे वह अपनी बात को जल्दबाजी में बोलने लगता है। यही जल्दबाजी हकलाहट का कारण बन जाती है।